आपकी ये छोटी सी कविता बड़ा गहरा सच बोल देती है। आपने एक ही लाइन में उस औरत की पूरी कहानी रख दी, जो सबको खिलाती है लेकिन खुद अधूरी रह जाती है। पढ़ते ही मन में हल्की सी कसक उठती है और सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने घर में क्या देख रहे हैं और क्या नजरअंदाज कर रहे हैं।
और वह कड़ाही में लगी खुरचन से ही पेट भर लेती थी अपना, हाँ, होता था ऐसा पहले, अब भी शायद कहीं होता होगा, मार्मिक रचना!
जवाब देंहटाएंWah!!!! Kitne kam shabdon mein kitni gehri baat!!!! - How do we know
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 20 एप्रिल, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत खूब. मुझे लगा यह मेरी माँ की कहानी है.
जवाब देंहटाएंभावपूर्ण रचना
जवाब देंहटाएंWahhh
जवाब देंहटाएंबनाने वाला कब खा पाता है भला
Hmmm.
जवाब देंहटाएंआपकी ये छोटी सी कविता बड़ा गहरा सच बोल देती है। आपने एक ही लाइन में उस औरत की पूरी कहानी रख दी, जो सबको खिलाती है लेकिन खुद अधूरी रह जाती है। पढ़ते ही मन में हल्की सी कसक उठती है और सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने घर में क्या देख रहे हैं और क्या नजरअंदाज कर रहे हैं।
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