जानता हूँ तुम्हें
नौ महीने हो गए गर्भ में,
पर छटपटाओ मत,
हो सके, तो अंदर ही रहो,
बाहर हवा ज़हरीली है,
ड्रोन, बम और मिसाइलें
तुम्हारे इंतज़ार में हैं।
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एक ऐसा युद्ध करते हैं,
जिसमें मिसाइलें बरसाएँ फूल,
तोपों की नलियाँ फेंकें गुलाल,
बंदूकों से निकले इत्र,
सिपाही खुरचकर मिटा दें
मुल्कों के बीच खींची लकीरें।

मार्मिक रचना
जवाब देंहटाएंबेहद गहन अर्थ लिए मर्म छूती भावपूर्ण अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३१ मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
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