फ़ाइल बाद में बना लेंगे,
पहले पासवर्ड बनाते हैं,
छिपाने का इंतज़ाम करते हैं,
बाद में तय करेंगे
कि छिपाना क्या है।
**
याद रखना पासवर्ड,
बस तीन मौक़े मिलेंगे,
कोई ज़िंदगी नहीं है
कि बार-बार ग़लती करो
और रास्ता खुला रहे।
फ़ाइल बाद में बना लेंगे,
पहले पासवर्ड बनाते हैं,
छिपाने का इंतज़ाम करते हैं,
बाद में तय करेंगे
कि छिपाना क्या है।
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याद रखना पासवर्ड,
बस तीन मौक़े मिलेंगे,
कोई ज़िंदगी नहीं है
कि बार-बार ग़लती करो
और रास्ता खुला रहे।
आइसक्रीम वाला आता था,
तो आ जाते थे
मोहल्ले के सारे बच्चे,
यह उन दिनों की बात है,
जब फ़्रिज़ नहीं होते थे घरों में,
जब नहीं होती थी आइसक्रीम
सिर्फ़ आइसक्रीम.
++
वह बच्चा, जो रोज़ बेचता है
मोहल्ले में आइसक्रीम ,
अक्सर सोचता है,
अगर वह बेचनेवाला नहीं,
ख़रीदनेवाला होता,
तो वह भी खा सकता था
कभी-कभार कोई आइसक्रीम।
ट्रेन,
इतनी देर क्यों रुकती हो तुम?
कोई तो नहीं चढ़ता यहाँ से,
किसका इंतज़ार है तुम्हें?
किस उम्मीद में जी रही हो तुम?
तुम्हारे पास तो कोई
कमी भी नहीं यात्रियों की,
भरी रहती हो हमेशा,
फिर वह कौन है, जिसके लिए
इतनी जगह है तुम्हारे दिल में,
जिसे कोई क़द्र नहीं तुम्हारी?
ट्रेन,
मेरी बात मानो,
किसी दिन बिना रुके चली जाओ,
झुककर तो बहुत देख लिया तुमने,
एक बार सिर उठाकर भी देखो ।
न जाने कब से खड़ा हूँ
इस भीड़-भरे प्लेटफ़ॉर्म पर,
ट्रेनें आती जा रही हैं
कभी इस ओर से,
कभी उस ओर से,
रुक रही हैं ठीक मेरे सामने।
चढ़ रहे हैं यात्री
अपनी-अपनी ट्रेनों में
पहुँच ही जाएंगे गंतव्य तक,
पुराने यात्रियों की जगह
आ गए हैं अब नए यात्री,
पर मैं वहीं खड़ा हूँ, जहां था।
कब तक करूंगा इंतज़ार,
कब तक रहूँगा दुविधा में,
अब चढ़ ही जाता हूँ
किसी-न-किसी ट्रेन में,
चढ़ूँगा, तभी तो पहुंचूंगा
कहीं-न-कहीं, कभी-न-कभी।
इन दिनों आसमान में
नहीं दिखते बादल,
धुआँ दिखता है,
नहीं कड़कती बिजली,
बमों के धमाके होते हैं,
नहीं होतीं बौछारें,
मिसाइलें बरसती हैं ।
इन दिनों आसमान में
नहीं उड़ते परिंदे,
लड़ाकू विमान दिखते हैं,
ड्रोन उड़ते हैं।
इन दिनों आसमान में
न सितारे दिखते हैं, न चाँद,
रह-रहकर कौंध जाती हैं
प्रकाश की कटारें।
बहुत दिनों से आसमान में
नहीं दिखा सूरज,
शायद हमारी तरह वह भी
बहुत डरता है युद्ध से।