मंगलवार, 2 जून 2020

४४१.परिंदा

Hummingbird, Bird, Flight, Avian

एक परिंदा डरते-डरते 
मेरी खिड़की पर आया,
फिर उड़ गया,
अगले दिन फिर आया,
एक पैर खिड़की के अन्दर रखा,
फिर उड़ गया.

थोड़े दिनों में वह 
घर के अन्दर घुस आया,
आस-पास बैठने लगा,
साथ बैठकर खाना खाने लगा.

मैंने पूछा,'डर नहीं लगता तुम्हें?'
उसने कहा,'लगता है,पर क्या करें?
तुम लोग बाहर कम निकलते हो,
तुम्हारे बिना हमारा मन नहीं लगता.'

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 01 जून 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 03 जून 2020 को साझा की गई है....  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. एक दूजे से बंधे जीवों में आत्मीय बोध प्रगाढ़ होता है
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  4. तुम लोग बाहर कम निकलते हो,
    तुम्हारे बिना हमारा मन नहीं लगता..
    अत्यन्त सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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  5. वाह! अद्भुत रागात्मक बिम्ब!

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  6. परिंदे तो मनुष्य के बाहर ना निकलने से खुश होते होंगे। परंतु कुछ परिंदों को सच में मनुष्य के साथ साथ जीने की आदत सी हो जाती है जैसे गौरेया। सुंदर रचना

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  7. सुंदर भावाभिव्यक्ति👌👌👌

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  8. achha blog hai. I have read some post and great kavita's by different people. hindi me kahaniya

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  9. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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