मेरे घर आना,
तो करवा चौथ पर आना,
वही एक दिन है,
जब मुझे अपना घर
अपना-सा लगता है।
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करवा चौथ के दिन
मैं चाँद से कहता हूँ,
समय पर उग जाना,
वह देर से उगता है,
तो दोषी उसे नहीं,
मुझे ठहराया जाता है।
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करवा चौथ के दिन
इतना शांत होता है मेरा घर
कि यह मुझे अपना नहीं,
किसी और का घर लगता है।
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करवा चौथ के बाद
पत्नी का मूड ऐसे बदलता है,
जैसे बरसात के तुरंत बाद
निकल आए कड़ी धूप।



