एक गोरी-चिट्टी बच्ची,
जो युद्ध में मारी गई,
ईरानी थी,
वह अमेरिका के स्कूल में होती,
तो कहना मुश्किल था
कि वह अमेरिकी नहीं, ईरानी है।
एक गोरी-चिट्टी बच्ची,
जो युद्ध में मारी गई,
ईरानी थी,
वह अमेरिका के स्कूल में होती,
तो कहना मुश्किल था
कि वह अमेरिकी नहीं, ईरानी है।
जानता हूँ तुम्हें
नौ महीने हो गए गर्भ में,
पर छटपटाओ मत,
हो सके, तो अंदर ही रहो,
बाहर हवा ज़हरीली है,
ड्रोन, बम और मिसाइलें
तुम्हारे इंतज़ार में हैं।
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एक ऐसा युद्ध करते हैं,
जिसमें मिसाइलें बरसाएँ फूल,
तोपों की नलियाँ फेंकें गुलाल,
बंदूकों से निकले इत्र,
सिपाही खुरचकर मिटा दें
मुल्कों के बीच खींची लकीरें।
रात को बार-बार चौंकती है,
झटके से उठ जाती है लड़की,
पसीने से लथपथ हो जाती है,
डरकर सहम जाती है लड़की।
पानी के घूंट हलक से उतारती है,
उठकर खिड़की तक जाती है,
चुपके से गली में झाँकती है,
सब कुछ ठीक पाती है लड़की।
फिर से बिस्तर पर आकर
नींद का इंतज़ार करती है,
आज तय करती है लड़की,
कल से टी.वी. नहीं देखेगी,
न ही अख़बार पढ़ेगी लड़की।
एक ख़ूबसूरत-सा ख़्वाब देखा मैंने,
गुलाब के हाथों में गुलाब देखा मैंने।
कहते हैं आँखें उसकी झील सी हैं,
गुलाब में झील, झील में गुलाब देखा मैंने।
न कभी सुना था, न कभी सोचा था,
एक चलता-फिरता गुलाब देखा मैंने।
जहां न खिला था, न खिल सकता था,
उसी सहरा में गुलाब देखा मैंने।
गुलाब नावाक़िफ़ था गुलाब होने से,
उसने माना ही नहीं कि गुलाब देखा मैंने।
जानता हूँ, उसने कांटे देखे मुझमें,
उसे पता है, उसमें गुलाब देखा मैंने।
इस बात से वह नाराज़ है मुझसे,
उसमें काँटा नहीं, गुलाब देखा मैंने।
न नींद आती है, न चैन पड़ता है,
किस मनहूस घड़ी में गुलाब देखा मैंने?