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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

863. पाटखोड़ी

 


क्या आपने जूट की लकड़ी देखी है?

मेरे यहाँ पाटखोड़ी कहते हैं इसे, 

पतली-सी होती है,कमज़ोर सी,

पाँव पड़ते ही टूट जाती है,

पर जब यह जलती है,

तो देखने लायक होता है इसका जलना,

एकदम से धधक उठती है सिर से पाँव तक. 


एक बार जल उठे,

तो रोकना मुश्किल होता है इसे,

फिर राख होने तक जलती है, 

फिर जलाकर ही मानती है यह। 



गुरुवार, 23 जुलाई 2026

862. जुगनू

 


जब डूब जाता है सूरज,

आकाश में नहीं होते चाँद-सितारे,

जब नहीं चमकती बिजली,

नहीं जलती कोई लालटेन,

चुक जाते हैं दीपक के तेल-बाती,

जब नहीं भड़कता कहीं कोई शोला, 

जब नहीं सूझता हाथ को हाथ,

घनघोर अंधेरा हँसता है ठठाकर,

तब मैं उठाता हूँ बीड़ा,

निकलता हूँ बाहर,

ललकारता हूँ अँधेरे को,

करता हूँ उद्घोष 

कि रौशनी अभी ज़िंदा है। 


शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

861.दृष्टि

 



जितना झुक सकता था,

उससे ज़्यादा झुक गया हूँ मैं, 

जीने के लिए अब उठना, 

खड़ा होना ज़रूरी है। 


और मत झुकाओ मुझे,

ज़रा सीधा होने दो,

इतना झुक चुका हूँ मैं 

कि मुझे साफ़-साफ़ दिखने लगा है 

अपना ज़रूरत से ज़्यादा झुकना,

तुम्हारा ज़रूरत से ज़्यादा तनना। 



शनिवार, 20 जून 2026

860. ऐसे पढ़ो मुझे


 

मैं गीता हूँ,

बाइबल हूँ,

क़ुरान हूँ। 


मुझे पढ़ो,

मगर वैसे नहीं,

जैसे पढ़ा गया है अब तक। 


मुझे थोड़ा पढ़ो,

ज़्यादा समझो,

मुझे अनपढ़ों की तरह पढ़ो,

पढ़े-लिखों की तरह समझो। 



शनिवार, 13 जून 2026

859. कोशिश

 


बहुत कोशिशों से मैंने 

कांटे उगाए हैं खुद में,

पर इसका मतलब यह नहीं 

कि अब फूल नहीं खिलते मुझमें। 


मेरे पास आओगे,

तो काँटों का सामना करना पड़ेगा,

मैं कमज़ोर-सा पौधा ही सही,

अपने नाज़ुक फूलों की हिफ़ाज़त के लिए

कोशिश तो कर ही सकता हूँ।