मंगलवार, 28 जुलाई 2020

४६३.साझा संपत्ति

Boy, Child, Dad, Family, Father, Female

कैसे तय कर दी तुमने 
उसकी नियति अकेले-अकेले?
कैसे भूल गए तुम 
कि वह मेरी भी संतान है?

मैंने रचा है उसे 
ख़ुद में छिपाकर,
महीनों तक सींचा है उसे 
अन्दर-ही-अन्दर.

याद रखना
कि जिस संपत्ति का भविष्य
तुम तय करना चाहते हो,
वह तुम्हारी अकेले की नहीं 
साझा संपत्ति है.

6 टिप्‍पणियां:

  1. याद रखना
    कि जिस संपत्ति का भविष्य
    तुम तय करना चाहते हो,
    वह तुम्हारी अकेले की नहीं
    साझा संपत्ति है.बहुत सुंदर और सार्थक सृजन

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  2. कम से कम बच्चों का भविष्य तय करते समय तो माँ की राय भी लेनी चाहिए
    पुरुष प्रधान समाज में नारी को इतना भी हक नहीं..
    विचारणीय प्रस्तुति
    वाह!!!

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  3. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार( 31-07-2020) को "जन-जन का अनुबन्ध" (चर्चा अंक-3779) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

    "मीना भारद्वाज"

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  4. सुन्दर और सराहनीय बेहतरीन प्रस्तुति

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