सोमवार, 30 नवंबर 2020

५०९. कोरोना में लाशें

लाइन में लगे-लगे 

थक गई हैं लाशें,

परेशान हैं,

जलने के इंतज़ार में हैं,

लाशें सोचती हैं 

कि मरने में उतनी मुश्किल नहीं हुई,

जितनी जलने में हो रही है. 

**

लाशें बेताब हैं

अस्पताल से छुट्टी के लिए,

उन्हें डर है 

कि मरीज़ उन्हें देखकर 

डर न जायँ,

बेमौत न मर जायँ.

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चिता पर रखी लाश 

जल्दी जल जाना चाहती है,

उसे उन लाशों की चिंता है,

जो अपनी बारी के इंतज़ार में हैं.

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (02-12-2020) को "रवींद्र सिंह यादव जी को  बिटिया   के शुभ विवाह की  हार्दिक बधाई"  (चर्चा अंक-3903)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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