सोमवार, 9 नवंबर 2020

५०१. कलाकार से

सुनो कलाकार,

गली-गली घूमकर 

चिल्लाने से क्या फ़ायदा,

यहाँ सभी बहरे हैं,

कोई नहीं ख़रीदेगा

तुम्हारा सामान,

कोई नहीं पहचानेगा 

तुम्हारा हुनर.


अगर चाहते हो 

कि तुम्हारा सामान बिके,

तुम्हारे हुनर की क़द्र हो,

तो गली-गली घूमना छोड़ो,

चुपचाप घर बैठो.


यह बात गांठ बाँध लो

कि पुकारकर बेचने से 

अनमोल चीज़ की भी 

कोई क़ीमत नहीं होती.

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (11-11-2020) को   "आवाज़ मन की"  (चर्चा अंक- 3882)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. वाह , सच है , बेहतरीन अभिव्यक्ति !

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  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 10
    नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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