गुरुवार, 12 नवंबर 2020

५०२.मौत के बाद


वह कौन है,

जिसकी आवाज़ 

हर ओर सुनाई देती है,

जिसकी हँसी

हमेशा कानों में गूंजती है?

कई दिन बीत गए,

जिसे विदा किए,

पर जिसकी सूरत 

हर तरफ़ दिखाई पड़ती है.


यह कैसा भ्रम है

कि वह दिखता भी है 

और नहीं भी,

वह वाचाल भी है 

और चुप भी,

वह है भी 

और नहीं भी.


असल में वह नहीं है,

पर अपने न होने में 

वह पहले से कहीं ज़्यादा है,

जैसे कि वह पूरा ज़िन्दा हुआ हो 

अपनी मौत के बाद.


10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 13
    नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर। बाकी अटल जी एक पंक्ति है "मौत सामने आकर खड़ी हो गई, मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।"

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  3. बहुत सुन्दर।
    रूप-चतुर्दशी और धन्वन्तरि जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१४-११-२०२०) को 'दीपों का त्यौहार'(चर्चा अंक- ३८८५) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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  5. बहुत बढ़िया सर!

    आपको दीपावली सपरिवार शुभ और मंगलमय हो।

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  6. वाह! एकदम सच है! Sorry for your loss sir.

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  7. प्रभावशाली लेखन - - दीपावली की असंख्य शुभकामनाएं - - नमन सह।

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