बुधवार, 2 दिसंबर 2020

५१०. कोरोना की वापसी



बड़ी मुश्किल से भगाया था तुमको,

पर तुम फिर लौट आए,

पहले जो तबाही मचाई थी,

उससे जी नहीं भरा तुम्हारा?

थोड़ी सी भी शर्म बची हो,

तो वापस लौट जाओ,

जिन्हें धक्के देकर निकाला जाता है,

वे इस तरह लौटा नहीं करते.

**

एक बार चला गया है,

पर वापस भी आ सकता है,

कोई राहगीर नहीं,

चोर उचक्का है,

उसे तुम्हारी अनुमति नहीं,

असावधानी का इंतज़ार है.


12 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 04-12-2020) को "उषा की लाली" (चर्चा अंक- 3905) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    "मीना भारद्वाज"

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 03 दिसंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. उसे तुम्हारी अनुमति नहीं,

    असावधानी का इंतज़ार है.
    इसी कहा है जब तक दवाई नहीं तब तक ढ़िलाई नहीं....
    बहुत सुन्दर।

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  4. कोरोना महामारी नहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा आपदा में अवसर है।

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  5. बुरी आदतें भी आसानी से कहाँ जाती हैं ... लौट लौट आती हैं ...
    विश्वास है ज़रूर भागेगा ये ...

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