सोमवार, 28 दिसंबर 2020

५१९. सोचा-समझा प्यार



तुमने तो कह दिया 

कि तुम्हें मुझसे प्यार है,

पर मुझे अभी तय करना है.


कई विकल्प हैं मेरे पास,

कहाँ नफ़ा ज़्यादा है,

कहाँ नुकसान कम है,

मुझे आकलन करना है.


जब हिसाब हो जाएगा,

पड़ताल पूरी हो जाएगी,

तभी बता सकूंगा तुम्हें 

कि मुझे तुमसे प्यार है या नहीं.


लैला-मजनूँ,शीरीं-फरहाद,

हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट,

कहानियों की बातें है,

अब न अँधा प्यार है,

न पहली दृष्टि का प्यार.


बदले समय में ज़रूरी है 

कि हम सोच-समझकर 

नफ़ा-नुकसान देखकर 

प्यार करना सीख लें.

12 टिप्‍पणियां:

  1. हम सोच-समझकर

    नफ़ा-नुकसान देखकर

    प्यार करना सीख लें.

    यह भी सही कहा आपने।
    सुंदर कुछ अलग-सी रचना।
    सादर।

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 29 दिसंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (30-12-2020) को "बीत रहा है साल पुराना, कल की बातें छोड़ो"  (चर्चा अंक-3931)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  4. बहुत अच्छा ल‍िखा ओंकार जी...अब न अँधा प्यार है,

    न पहली दृष्टि का प्यार....सब व्यापार है जो द‍िल से नहीं द‍िमाग से क‍िया जाता है

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  5. अब न अँधा प्यार है,
    न पहली दृष्टि का प्यार.
    सत्य कथन..सदैव की तरह चिन्तनपरक सृजन । नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।



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  6. आज के दौर की यह भी एक सच्चाई है। बहुत खूब। सादर। आपको नव वर्ष 2021 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  7. बदले समय में ज़रूरी है
    कि हम सोच-समझकर
    नफ़ा-नुकसान देखकर
    प्यार करना सीख लें.

    प्रेम के संदर्भ में आज के दौर पर करारा कटाक्ष करती सुंदर रचना 🌹🙏🌹

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