गुरुवार, 12 मार्च 2020

४०९.परिवर्तन

Train, Wagon, Windows, Railway

रेलगाड़ी,अब वे दिन कहाँ?

लोग इंतज़ार करते थे, 
ख़ुश होते थे,
जब तुम सीटियाँ बजाती आती थी,
बाँध लेते थे बोरिया-बिस्तर
तुमसे मिलने को बेक़रार रहते थे.

अब तो मजबूरी में मिलते हैं,
उड़ने को आतुर,
कार में चलने के शौकीन,
तुम साफ़-सुथरी राजधानी 
या शताब्दी भी हो,तो क्या?

मायूस मत होओ, रेलगाड़ी,
बस चलती रहो,जब तक हो,
लोगों को पुकारती,
सबका स्वागत करती,
परिवर्तन ही दुनिया का नियम है.

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 13 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं

  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की शनिवार(१४-०३-२०२०) को "परिवर्तन "(चर्चा अंक -३६४०) पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. हम तो आज भी उत्साह से मिलते है इस रेलगाड़ी से

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी रचनाएँ जमीन से जुड़ी होती है जिन्हें पढ़ कर सुखद अहसास होता है ।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह क्या सुंदर लिखावट है सुंदर मैं अभी इस ब्लॉग को Bookmark कर रहा हूँ ,ताकि आगे भी आपकी कविता पढता रहूँ ,धन्यवाद आपका !!
    Appsguruji (आप सभी के लिए बेहतरीन आर्टिकल संग्रह) Navin Bhardwaj

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

    जवाब देंहटाएं