शुक्रवार, 18 जून 2021

५८०. कोरोना में प्रेम कविताएँ

मैं कोरोना नहीं हूँ 

कि तुम मास्क लगा लो 

और दूर कर दो मुझे,

मास्क लगाकर तो तुमसे

इन्कार भी नहीं होता. 

**

यूँ परेशान मत होओ,

हाथ-पाँव मत मारो,

कोई असर नहीं होगा

रेमडेसिविर,प्लाज़्मा का,

मैं कोरोना नहीं हूँ,

एक बार घुस गया,

तो निकलता नहीं हूँ. 

**

वैसे तो हज़ारों हैं यहाँ,

पर तुम नहीं, तो कोई नहीं,

मैं कोरोना नहीं हूँ 

कि किसी का भी हो जाऊँ।


11 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-06-2021) को 'भाव पाखी'(चर्चा अंक- 4101) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।

    अनिता सुधीर

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  2. वाह!बहुत ही सुंदर सृजन।
    सादर

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  3. वाह ! बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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  4. वाह! बहुत खूब
    गागर में सागर।

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  5. बहुत मज़ेदार प्रेम कविताएँ. प्रेम, प्रेम है कोरोना नहीं जो वैक्सीन से डर जाए या किसी का भी हो जाए. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. बधाई.

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