सोमवार, 10 मई 2021

५६४.ख़बरें



अगर आती रहीं ऐसे ही 

अपनों के जाने की ख़बरें,

तो आदत सी पड़ जाएगी,

बहुत शर्म आएगी ख़ुद पर 

जब फ़र्क पड़ना बंद हो जाएगा. 

**

इन दिनों मैं सहमा हुआ हूँ,

खटका लगा रहता है हर वक़्त

कि न जाने कब किसके 

जाने की ख़बर आ जाय.

बहुत से अपने चले गए हैं,

न जाने किसका बुलावा आ जाय,

मैं जाने से नहीं डरता,

अकेला रह जाने से डरता हूँ. 

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत शर्म आएगी ख़ुद पर

    जब फ़र्क पड़ना बंद हो जाएगा. ---वाह मन और हालात यही कह रहे हैं, आपने शब्दों की गहराई से वह बात कह दी जिसे आज हर व्यक्ति महसूस कर रहा है।

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (11 -5-21) को "कल हो जाता आज पुराना" '(चर्चा अंक-4062) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

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  3. आज का दर्द और डर बयान करता हृदयस्पर्शी सृजन।

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  4. दर्द या डर ... कम शब्दों में गहरी और दूर की बात ...

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