शनिवार, 30 अक्तूबर 2021

६१५. इंसान

 


इंसान हो,तो साबित करो,

कहने से क्या होता है?


दूसरों के दुःख से 

दुखी होकर दिखाओ,

दूसरों के आँसुओं से 

पिघलकर दिखाओ. 


दूसरों की कामयाबी पर 

ख़ुश होकर दिखाओ,

जो हार चुके हैं सर्वस्व,

उन्हें गले लगाकर दिखाओ. 


भूखे की रोटी,

प्यासे का पानी,

नंगे का कपड़ा,

बेघर का घर बन के दिखाओ. 


किसी बेजान दिल की 

धड़कन बन के दिखाओ,

गहरे अँधेरे में 

दिया बन के दिखाओ,

घनघोर जंगल में 

पगडंडी बन के दिखाओ. 


इंसान हो तो साबित करो,

कहते तो सभी हैं,

कहने से क्या होता है?


6 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (31-10-21) को "गीत-ग़ज़लों का तराना, गा रही दीपावली" (चर्चा अंक4233) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  2. बहुत सुंदर सृजन हृदय स्पर्शी सार्थक।

    किसी बेजान दिल की

    धड़कन बन के दिखाओ,

    गहरे अँधेरे में

    दिया बन के दिखाओ।
    बहुत सुंदर।

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  3. इंसान हो,तो साबित करो,
    कहने से क्या होता है? बहुत सुंदर एवं सटीक रचना,

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  4. गहरे अँधेरे में
    दिया बन के दिखाओ,
    घनघोर जंगल में
    पगडंडी बन के दिखाओ.
    मानवीय मूल्यों का स्मरण कराती उत्तम भावाभिव्यक्ति ।

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