सोमवार, 11 अक्तूबर 2021

६०९. फ़ेसबुक पर तस्वीर

 


देखो, हमारी यह तस्वीर,

कितने अच्छे लग रहे हैं हम,

साथ-साथ कितने ख़ुश,

खुलकर मुस्कराते  हुए. 


मुश्किल से आ पाए हम इतने क़रीब,

मुस्करा पाए इस तरह,

ख़ुश लग पाए इतने,

फ़ोटो खिंचवाने लायक बन पाए.  


चलो, अब इसे फ़ेसबुक पर लगा दें,

लोग बातें करें कि देखो, कितने ख़ुश हैं,

कमेंट करें,लाइक करें,शेयर करें,

कुछ शायद जल-भुन भी जायँ

कि हम उनसे ज़्यादा ख़ुश क्यों हैं.


साल में एकाध बार ही सही 

ऐसी तस्वीर अगर खिंच जाय,

तो फ़ेसबुक हक़ीक़त को 

बड़ी आसानी से ढक देती है. 


7 टिप्‍पणियां:

  1. 😀😀 बहुत बढ़िया ओंकार जी। प्रायः सभी लोग अपने जीवन को अधिक खुश और खुशहाल दिखाने के लिए ऐसी तस्वीरें फेसबुक पर लगाते हैं मानो उनसे सुखी दंपती और प्रेमी युगल इस संसार में कोई दूसरा नहीं। पर अच्छा है जो दिखता है वही सत्य मानने का दुनिया में चलन है, भले हकीकत का ऐसी तस्वीरों से कोई वास्ता ना हो।🙏

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (13-10-2021) को चर्चा मंच         "फिर से मुझे तलाश है"    (चर्चा अंक-4216)     पर भी होगी!--सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।--श्री दुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

    जवाब देंहटाएं
  3. यतार्थ व्यक्त करती सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  4. चलो,अब इसे फ़ेसबुक पर लगा दें,
    लोग बातें करें कि देखो, कितने ख़ुश हैं,
    कमेंट करें,लाइक करें,शेयर करें,
    कुछ शायद जल-भुन भी जायँ
    कि हम उनसे ज़्यादा ख़ुश क्यों हैं.
    बिल्कुल सही कहा आपने 😃😃
    याथर्थ पर आधारित बहुत ही सुंदर सृजन!

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया और आज के परिदृष्य का सटीक चित्रण ।

    जवाब देंहटाएं
  6. शानदार तंज।
    सुंदर सृजन।
    सार्थक।

    जवाब देंहटाएं