शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

५३४. घास



घास के कुछ तिनके 

औंधे मुँह पड़े हैं,

सारी दुनिया से बेख़बर,

अपने आप में मस्त.


कुछ तिनके ऐसे भी हैं,

जो सीधे खड़े हैं,

उन्हें डर है कि 

अगर आसमान गिर पड़ा,

तो उनका क्या होगा.


हो सकता है,

उन्हें यह भी लगता हो 

कि अगर आसमान गिर पड़ा,

तो शायद उसे 

वे अपने सिर पर रोक लें.

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब। सार्थक प्रस्तुति के लिए आपको बधाई।

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  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार 15 फ़रवरी 2021 को चर्चामंच <a href="https://charchamanch.blogspot.com/ बसंत का स्वागत है (चर्चा अंक-3978) पर भी होगी।

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  3. वाह !!!
    बेहतरीन अभिव्यक्ति 🌹🙏🌹

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  4. ओंकार जी , घास सोचे न सोचें पर इन्सान हर भाव कितने तरीके से सोच लेता है । सुंदर प्रस्तुति ।

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  5. बहुत ही सुंदर कविता
    बधाई

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  6. हो सकता है,

    उन्हें यह भी लगता हो

    कि अगर आसमान गिर पड़ा,

    तो शायद उसे

    वे अपने सिर पर रोक लें.----- बहुत बहुत सुन्दर

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  7. बहुत ही बढ़िया है, बधाई हो आपको

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