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रविवार, 24 मई 2020

४३८.ख़तरा

Call, At Home, Stay, Contact Lock

खिड़कियाँ बंद हैं,
दरवाज़े बंद हैं,
टहल रही है घर भर में 
वही बासी हवा.

सुबह से शाम तक 
वही दीवारें, वही छत,
मुश्किल है अब बंद रहना,
बाहर निकलने से बचना.

जी चाहता है, 
खुली हवा में सांस लें,
निकल चलें बाहर,
पर ख़तरा है,
जो अब भी खड़ा है,
लक्ष्मण-रेखा है,
जो अब भी खिंची है.

7 टिप्‍पणियां:

  1. जाने कब मिटेगी ये रेखा ...
    सच है बहुत देर हो रही है अब ...

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  2. जी चाहता है,
    खुली हवा में सांस लें,
    निकल चलें बाहर,
    पर ख़तरा है,
    जो अब भी खड़ा है,
    सही कहा आपने...खतरा है कि अभी भी वैसे का
    वैसा ही है । सुन्दर सृजन ।

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  3. बहुत अच्छी सोच की कविता

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. कोरोना काल का ये अनुभव याद रहेगा। 🙏🙏

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  6. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे
    Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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