बुधवार, 20 जनवरी 2021

५२६. चिड़िया से



चिड़िया,

क्यों चीं-चीं कर रही हो,

कौन है जो सुनेगा तुम्हें,

किसे फ़ुर्सत है इतनी,

अगर सुनना भी चाहे,

तो इस भीषण कोलाहल में 

किसके कानों तक पहुँच पाएगी 

तुम्हारी कमज़ोर सी आवाज़?


चिड़िया,

कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें इस शहर में,

घोंसला बनाने की जगह तक नहीं,

घुट-घुट कर मर जाओगी यहाँ 

मेरी मानो, गाँव लौट जाओ.


12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज गुरुवार 21 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर संदेश देकर, सजग करती सुन्दर पंक्तियाँ..

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  3. पर्यावरण के खौफनाक पहलू को दर्शाती रचना

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  4. चिड़िया के माध्यम से बिगड़ते पर्यावरण पर सटीक चिंतन।

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