सोमवार, 4 जनवरी 2021

५२१. नया साल

वह मुझे ताक रहा था,

उसकी आँखों में नफ़रत थी,

जैसे ही मैंने उसे देखा,

वह मुस्कराकर बोला,

हैप्पी न्यू इयर.

**

जो साल भर लगे रहे,

मेरा साल बर्बाद करने में,

नए साल पर मिले, तो बोले,

नया साल मुबारक हो.

**

इतना पागल भी क्या  होना 

नए साल के पीछे,

हर नया अच्छा ही हो,

हर पुराना बुरा ही हो,

ज़रूरी तो नहीं है.

**

अच्छा है कि नए साल में 

नज़र नहीं आया पुराना साल,

वरना कैसे नज़रें मिलाता,

क्या कहता उससे 

कि नए साल में ऐसा क्या है,

जो उसमें नहीं था.


6 टिप्‍पणियां:

  1. नव वर्ष मंगलमय हो। सुन्दर सृजन।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (06-01-2021) को "अभी बहुत कुछ सिखायेगी तुझे जिंदगी"     (चर्चा अंक-3938)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  3. बहुत खूब!! अत्यंत सुन्दर!!

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  4. जरुरी नहीं कि हर पुरानी चीज बुरी ही हो ! पर आने वाला समय शुभ हो कामना तो यही है !

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  5. बहुत-बहुत प्यारी और सराहनीय कृति..

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