सोमवार, 24 अगस्त 2020

४७३.नाम

Girl, Woman, Female, Person, Mountain

मुझे अच्छा लगता है अपना नाम,

जब पुकारता है कोई धीरे से 

अक्षर-अक्षर में भरकर 

ढेर-सारा प्यार.


भीगी हवाओं की तरह 

मेरे कानों तक पहुँचता है मेरा नाम,

ख़ुशी से भर देता है मेरा पोर-पोर.


मैं कोई जवाब नहीं देता,

बस कान खुले रखता हूँ,

चाहता हूँ कि पुकारनेवाला 

पुकारता ही रहे मेरा नाम,

जवाब दे दूंगा,तो कैसे सुनूँगा

बार-बार लगातार 

उसके मुँह से अपना नाम?

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (26-08-2020) को   "समास अर्थात् शब्द का छोटा रूप"   (चर्चा अंक-3805)   पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 25 अगस्त 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत खूब ... सच है पुकार लिए तो बात शुरू ... नाम गुम ...

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