बुधवार, 12 अगस्त 2020

४६९. खेतों की कविताएँ

 Seed, Sowing, Shoots, Young, Fresh

इस बार जब  

खेत में बोओ 

धान या गेहूँ,

तो मुझे बता देना .


मैं भी बो दूंगा 

आस-पास वहीं 

कविताओं  के बीज,

डाल दूंगा थोड़ी 

कल्पनाओं की खाद,

भावनाओं का पानी.


उन्हीं बीजों से निकलेंगी

खेतों की कविताएँ,

जिनमें महकेगी मिट्टी,

झूमेंगी बालियाँ,

जिनको खोलो,

तो दिखेंगे

धान और गेंहूं के दाने.

11 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार(14-08-2020) को "ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो" (चर्चा अंक-3793) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 13 अगस्त 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत खूब ... कविताओं के बीज भी उगायेंगे धान और गेहूं ...
    उत्तम ...

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  4. शानदार रचना । मेरे ब्लॉग पर आप का स्वागत है ।

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  5. बहुत ही सुंदर,काश ऐसी कोई तकनीक होती तो प्रेम के बीज भी बो दिए जाते,सादर नमन

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  6. बहुत ही सुन्दर भावना प्रस्तुत की है

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