बुधवार, 29 दिसंबर 2021

६३१. अजीब दुनिया

 


मैं जब नफ़रत की बात करता हूँ,

तो सारे कान खड़े हो जाते हैं,

पर जब प्यार की बात करता हूँ,

तो किसी को कुछ नहीं सुनता. 


किसी का ख़ून बहाना हो,

तो भीड़ जमा हो जाती है,

किसी की जान बचानी हो,

तो मैं अकेला रह जाता हूँ. 


किसी को दूर करना हो,

तो एक पल भी नहीं लगता,

किसी को गले लगाना हो,

तो सालों बीत जाते हैं. 


यह दुनिया भी अजीब दुनिया है,

दुःख के पीछे दौड़ती है 

और जो सामने खड़ा है,

उस सुख के लिए तरसती है. 


6 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(३१-१२ -२०२१) को
    'मत कहो अंतिम महीना'( चर्चा अंक-४२९५)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. किसी का ख़ून बहाना हो,

    तो भीड़ जमा हो जाती है,

    किसी की जान बचानी हो,

    तो मैं अकेला रह जाता हूँ.


    बहुत ही सुंदर रचना।
    बहुत दिनों बाद कुछ नया पड़ने को मिला धन्यवाद

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  3. बहुत ही सही बात कही आपने!
    एक एक पंक्ति हकीकत को बयां कर रही है!

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  4. यह दुनिया भी अजीब दुनिया है,
    दुःख के पीछे दौड़ती है
    और जो सामने खड़ा है,
    उस सुख के लिए तरसती है.
    बहुत सही कहा आपने । नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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