सोमवार, 15 नवंबर 2021

६२०. चित्र

 


अपने आलीशान घर की दीवार पर 

उसने एक चित्र लगाया,

जिसमें लकड़ी का एक सुन्दर घर था,

आसपास हरियाली थी,

रंग-बिरंगे फूल खिले थे,

सामने नदी बह रही थी. 


अब वह सुबह से शाम तक 

उस चित्र को देखता रहता है,

अब अपना घर उसे अच्छा नहीं लगता. 


5 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सच लिखा आपने ।हम कितने भी भौतिक संसाधनों का आभामंडल लपेट लें लेकिन आनंद तो प्रकृति की गोद में ही मिलता है ।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (17-11-2021) को चर्चा मंच        "मौसम के हैं ढंग निराले"    (चर्चा अंक-4251)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    --
     हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   
    'मयंक'

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  3. बहुत ही सुंदर!
    प्राकृतिक खूबसूरती की बात ही कुछ और है

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