शुक्रवार, 12 नवंबर 2021

६१९. ग्रास

 




पिता की मृत्यु के बाद 

कोई कौआ कभी 

हमारी मुंडेर पर नहीं आया,

पितृपक्ष में भी नहीं. 


माँ कहती है,

पिता ख़ुश नहीं थे 

अपने अंतिम दिनों में,

कई बार भूखे पेट सो जाते थे. 


पिता को अगर भूख लगी,

तो कहीं और चले जाएंगे,

माँ जानती है 

कि वे कभी नहीं आएँगे 

इस घर में अपना ग्रास लेने.    


9 टिप्‍पणियां:

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार
    (14-11-21) को " होते देवउठान से, शुरू सभी शुभ काम"( चर्चा - 4248) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 14नवंबर 2021 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !











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  5. एक कहावत है -
    'जियत पिता पर दंगम-दंगा,
    मरे पिता पहुंचे गंगा.'
    एक महत्वपूर्ण प्रश्न !
    संतान को अपने वृद्ध माता-पिता के जीवन में उनकी सेवा करने को महत्व देना चाहिए न कि उनकी मृत्यु के बाद धूमधाम से उनका अंतिम संस्कार करने में या उनका प्रति वर्ष श्राद्ध करने में !

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