मैं सांस ले रहा हूँ,
चल-फिर रहा हूँ,
सब कुछ कर रहा हूँ,
पर मेरा दिल है
कि ढूंढने पर भी मुझे
मिलता ही नहीं.
कभी कोई ढंग का
डॉक्टर, वैद्य या हकीम मिले,
तो जांच कराऊँ,
पता तो चले
कि मेरे पास भी कोई
धड़कता हुआ दिल है क्या.
मैं सांस ले रहा हूँ,
चल-फिर रहा हूँ,
सब कुछ कर रहा हूँ,
पर मेरा दिल है
कि ढूंढने पर भी मुझे
मिलता ही नहीं.
कभी कोई ढंग का
डॉक्टर, वैद्य या हकीम मिले,
तो जांच कराऊँ,
पता तो चले
कि मेरे पास भी कोई
धड़कता हुआ दिल है क्या.
मेरा तुमसे रिश्ता,
जैसे वसंत के मौसम में
खिला-खिला सा चमन,
जैसे बारिश के बाद
धुला-धुला सा आसमान,
जैसे पहाड़ों के पेड़ों पर
पसरा हुआ कोहरा,
जैसे जंगल में गूंजता
चिड़िया का गान,
जैसे चाँद को दुलारती
बहती हुई नदी.
मेरा तुमसे रिश्ता,
जैसे किसी पुराने एल्बम में
कोई पसंदीदा तस्वीर.
कितना अलग है यह रिश्ता
उन सारे रिश्तों से,
जो मैं कभी जी न सका,
पर ज़िन्दगी-भर निभाता रहा.
तो देखा, वह सो रही थी,
उसके चेहरे पर मुस्कान थी,
मासूम-सी लगी वह मुझे.
याद नहीं आता मुझे
कि मैं कभी उससे पहले जागा,
मुझे बेड टी देना,
मेरा टिफ़िन तैयार करना,
समय पर ऑफिस भेजना,
सारी ज़िम्मेदारी उसी की तो थी.
कभी पहले नींद खुली भी,
तो वक़्त कहाँ था कि देखता,
वह सोते में कैसी लगती है.
आज पहली बार मैंने देखी
उसके चेहरे पर बेफ़िक्री,
आज पहली बार मैंने देखा
उसे सुबह देर तक सोते,
सोचता हूँ, कितना अच्छा होता
अगर मैं पहले रिटायर हो जाता.
वह जब हँसता है,
तो डर जाते हैं सभी,
घुस जाते हैं घरों में,
बंद कर लेते हैं दरवाज़े,
समझ जाते हैं
कि होने वाला है कोई अनिष्ट.
जब कोई हँसता है,
तो अक्सर दूसरे भी हँसते हैं,
पर हमेशा ऐसा हो,
यह ज़रूरी नहीं है.
**
वह जब हँसता है,
तो काँपने लगती है ज़मीन,
ढहने लगते हैं घर,
सब प्रार्थना करते हैं
कि उसका हँसना
जल्दी बंद हो जाय.
**
उससे कहो
कि हँसे नहीं,
चुप रहे,
वह जब हँसता है,
तो मुहल्ले के सारे बच्चे
रोने लगते हैं.
**
वह जब हँसता है,
तो हँसने लगते हैं
गली के कुत्ते,
सच कहते हैं लोग
कि हँसी संक्रामक होती है.
नदी किनारे एक पत्थर
सालों से ऐसे ही पड़ा है,
चाहता है किसी के काम आए,
उस पर भी कोई चलाए
कभी छैनी-हथौड़ा।
**
नदी ने बड़े पत्थर को
घिस-घिस कर छोटा कर दिया है,
पत्थर ख़ुश है
कि वह चमका तो सही।
**
नदी किनारे पड़ा पत्थर
अपनी जगह नहीं छोड़ेगा,
साथ रहा है लहराती नदी के,
अब जब वह सूख गई है,
पत्थर उसे छोड़कर
कहीं नहीं जाएगा।
**
बूढ़ी हो गई है नदी,
अब नहीं आ पाती
किनारे के पत्थरों तक,
पर जब कभी आती है,
सब को भिगो जाती है।
**
नदी किनारे पड़ा पत्थर
अरसे से इंतज़ार में है
कि कोई लहर आए,
तरोताज़ा कर दे उसको भी।
**
बहुत दिनों से नहीं मिली
किनारे के पत्थरों से नदी,
पत्थर गुमसुम हैं,
नदी की भी आँखें गीली हैं।