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रविवार, 17 अप्रैल 2022

६४५. दिल

 


मैं सांस ले रहा हूँ,

चल-फिर रहा हूँ,

सब कुछ कर रहा हूँ,

पर मेरा दिल है 

कि ढूंढने पर भी मुझे 

मिलता ही नहीं.


कभी कोई ढंग का 

डॉक्टर, वैद्य या हकीम मिले,

तो जांच कराऊँ,

पता तो चले 

कि मेरे पास भी कोई 

धड़कता हुआ दिल है क्या.


13 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 19 अप्रैल 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. कड़वी सच्चाई को पन्नो पर बिखेर दिया आपने।
    सराहनीय।
    सादर

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  3. नितांत व्यक्तिगत है ये अनुभूति 🙏

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  4. दिल तो सभी के खो गए हैं आजकल या सो गए हैं, सुबह सूरज और रात को चाँद अब भी दुनिया को रोशन कर रहा है और लोग छोटी-छोटी बातों पर लड़ रहे हैं

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  5. सांस का आना जाना ही बताता है कि दिल धड़क तो रहा है ,बाकी दिल है या नहीं ये शोध का विषय है ।

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  6. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (20-04-2022) को चर्चा मंच      "धर्म व्यापारी का तराजू बन गया है, उड़ने लगा है मेरा भी मन"   (चर्चा अंक-4406)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'    --

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  7. दया और धर्म के अभाव में लाजिमी है शक होना कि दिल है भी कि नहीं हममें से किसी पे...
    बहुत ही सुंदर।

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  8. वाह ! कितना प्यारी दुविधा है ।
    दिल के डाॅक्टर को पता होगा क्या ?
    : )

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