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शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

865. इंतज़ार




घर की मुंडेर पर 

जब कोई कौवा 

कांव-कांव करता है,

बहुत ख़ुश  होती है 

वह अकेली औरत। 


बनाने लगती है 

अपने बेटे के लिए 

बेसन के लड्डू,

उसकी पसंद की सब्ज़ी,

झाड़ने लगती है 

उसका साफ़-सुथरा बिस्तर। 


अक्सर उसका बेटा 

घर नहीं आता,

पर कभी आ जाता है,

तो कौवे की कांव-कांव में 

बढ़ जाता है उसका भरोसा । 


कौवे को नहीं मालूम 

कि उसकी कांव-कांव का 

बेसब्री से इंतज़ार करती है 

किसी घर में कोई माँ। 


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