तुमने तो कह दिया
कि तुम्हें मुझसे प्यार है,
पर मुझे अभी तय करना है.
कई विकल्प हैं मेरे पास,
कहाँ नफ़ा ज़्यादा है,
कहाँ नुकसान कम है,
मुझे आकलन करना है.
जब हिसाब हो जाएगा,
पड़ताल पूरी हो जाएगी,
तभी बता सकूंगा तुम्हें
कि मुझे तुमसे प्यार है या नहीं.
लैला-मजनूँ,शीरीं-फरहाद,
हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट,
कहानियों की बातें है,
अब न अँधा प्यार है,
न पहली दृष्टि का प्यार.
बदले समय में ज़रूरी है
कि हम सोच-समझकर
नफ़ा-नुकसान देखकर
प्यार करना सीख लें.



