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सोमवार, 28 दिसंबर 2020

५१९. सोचा-समझा प्यार



तुमने तो कह दिया 

कि तुम्हें मुझसे प्यार है,

पर मुझे अभी तय करना है.


कई विकल्प हैं मेरे पास,

कहाँ नफ़ा ज़्यादा है,

कहाँ नुकसान कम है,

मुझे आकलन करना है.


जब हिसाब हो जाएगा,

पड़ताल पूरी हो जाएगी,

तभी बता सकूंगा तुम्हें 

कि मुझे तुमसे प्यार है या नहीं.


लैला-मजनूँ,शीरीं-फरहाद,

हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट,

कहानियों की बातें है,

अब न अँधा प्यार है,

न पहली दृष्टि का प्यार.


बदले समय में ज़रूरी है 

कि हम सोच-समझकर 

नफ़ा-नुकसान देखकर 

प्यार करना सीख लें.

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

५१८.हँसना ज़रूरी है


हँसो कि हँसना ज़रूरी है.


बाहर नहीं, तो अन्दर ही सही,

खुले में नहीं,तो बंद कमरे में सही,

कहीं भी सही,पर हँसना ज़रूरी है.


दिन में नहीं,तो रात में सही,

सुबह को नहीं,तो शाम को सही,

कभी भी सही,पर हँसना ज़रूरी है.


ज़ोर से नहीं, तो धीरे से सही,

धीरे से नहीं,तो बेआवाज़ ही सही,

कैसे भी सही,पर हँसना ज़रूरी है.


अभी अवसर है, जी भर के हँस लो,

कम-से-कम अकेले में, बेआवाज़ हंसने पर

अभी कोई पाबंदी नहीं है.

गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

५१७. वह स्त्री




बचपन में पिता ने कहा,

'चुप रहो',

जवानी में पति ने कहा,

'चुप रहो',

बुढ़ापे में बेटे ने कहा,

'चुप रहो',

हर किसी ने कहा,

'चुप रहो',

उसके बोलने का समय 

कभी आया ही नहीं.


एक दिन वह मर गई,

किसी ने नहीं पूछा उससे, 

'तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है?'

कोई पूछ भी लेता,

तो वह क्या जवाब देती,

उसे तो बोलना आता ही नहीं था. 


मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

५१६.विधवा से



ओ विधवा,

तुमने मेहँदी लगाना,

नाखून रंगना,

माँग सवारना,

बिंदी लगाना,

रंगीन कपड़े पहनना,

सजना, सवरना -

सब छोड़ दिया, 

ठीक नहीं किया,

पर तुमने बहुत ग़लत किया 

कि हँसना छोड़ दिया.

शनिवार, 19 दिसंबर 2020

५१५. सूर्यास्त


बस थोड़ी देर में 

शाम होने को है,

उतर रहा है झील में 

लहूलुहान सूरज,

बेसब्री से देख रहे हैं 

किनारे पर खड़े लोग.


मैं सोचता हूँ,

किसी को डूबते हुए देखना 

इतना अच्छा क्यों लगता है.