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बुधवार, 16 दिसंबर 2020

५१४. मछुआरे से


मछुआरे,

तुम मझधार में गए थे,

तुम्हें तो लौट आना था,

पर तुम उस पार चले गए.

अब नहीं लौटोगे तुम इस पार,

अगर मुझे तुमसे मिलना है,

तो मुझे भी जाना होगा उस पार 

और अगर मैं गया,

तो मैं भी नहीं लौटूंगा कभी इस पार.

**

मछुआरे,

तुम मछली पकड़ने गए थे 

गहरे समुद्र में,

हर बार तो तुम लौट आते थे,

इस बार कौन से मोती मिले 

कि तुम लौटे ही नहीं?

**

मछुआरे,

इस बार मैं भी चलूँगा तुम्हारे साथ,

दूर समुद्र में जाएंगे,

ख़ूब मछलियाँ पकड़ेंगे,

पर मुझे तैरना नहीं आता,

तुम्हें बचाना आता है न?

शनिवार, 12 दिसंबर 2020

५१३. गाँव वापसी


अब वे रास्ते नहीं रहे,

जिन पर मैं चलता था,

पक्की सड़कें हैं,

जिन पर बैलगाड़ियाँ नहीं,

मोटरगाड़ियाँ दौड़ती हैं,

पैडल वाले रिक्शे नहीं,

अब बैटरी-रिक्शे चलते हैं,

पक्के मकान उग आए हैं

खुले मैदानों में,

गुम हैं वे ग़रीब से होटल 

जिनमें चाय-समोसे बनते थे,

काठ और टीन के देवालय की जगह 

अब भव्य मंदिर खड़ा है,

अंग्रेज़ी बोलते बच्चे अब 

सर्र से निकल जाते हैं बगल से,

हाँ,अब भी वहीं है वह स्कूल,

जिसमें मैं पढ़ता था,

पर मुझे पहचानता नहीं,

जाता हूँ, तो पूछता है,

वह कौन सा साल था,

जब तुम यहाँ पढ़ते थे?

बुधवार, 9 दिसंबर 2020

५१२. मास्क



वैसे तो हम सब 

हमेशा लगाते थे,

इन दिनों तो बस 

दिखा रहे हैं.

**

जो सामने था,

वही तो मुखौटा था,

अब जो चढ़ा है,

मुखौटे पर मास्क नहीं,

तो और क्या है?

**

आँखों पर क्यों चढ़ा रखा है?

मुँह और नाक ही काफ़ी था,

मास्क का बहाना बनाकर 

कम-से-कम नज़रें तो मत चुराओ.

रविवार, 6 दिसंबर 2020

५११. 2020



बहुत तड़पाया तुमने,

बहुत रुलाया,

मजबूर किया 

घर में क़ैद रहने को,

मास्क लगवाए 

मुस्कराते चेहरों पर,

दूरी पैदा की 

अपनों के बीच.


कितनों को ला खड़ा किया 

सड़क पर तुमने,

कितनों को भूख से 

बेहाल कर दिया,

कितनों को छीन लिया 

हमेशा-हमेशा के लिए.


देखो,

दिसंबर आ गया है,

अब तुम्हें जाना ही होगा,

कितना भी जालिम क्यों न हो कोई,

जाना ही होता है उसे कभी-न-कभी.

बुधवार, 2 दिसंबर 2020

५१०. कोरोना की वापसी



बड़ी मुश्किल से भगाया था तुमको,

पर तुम फिर लौट आए,

पहले जो तबाही मचाई थी,

उससे जी नहीं भरा तुम्हारा?

थोड़ी सी भी शर्म बची हो,

तो वापस लौट जाओ,

जिन्हें धक्के देकर निकाला जाता है,

वे इस तरह लौटा नहीं करते.

**

एक बार चला गया है,

पर वापस भी आ सकता है,

कोई राहगीर नहीं,

चोर उचक्का है,

उसे तुम्हारी अनुमति नहीं,

असावधानी का इंतज़ार है.