वह कौन है,
जिसकी आवाज़
हर ओर सुनाई देती है,
जिसकी हँसी
हमेशा कानों में गूंजती है?
कई दिन बीत गए,
जिसे विदा किए,
पर जिसकी सूरत
हर तरफ़ दिखाई पड़ती है.
यह कैसा भ्रम है
कि वह दिखता भी है
और नहीं भी,
वह वाचाल भी है
और चुप भी,
वह है भी
और नहीं भी.
असल में वह नहीं है,
पर अपने न होने में
वह पहले से कहीं ज़्यादा है,
जैसे कि वह पूरा ज़िन्दा हुआ हो
अपनी मौत के बाद.




