top hindi blogs

गुरुवार, 19 मार्च 2020

४११. डर


एक डर है,
जो अन्दर गहरे 
घुसा जा रहा है.

नींद की तलाश में 
रातें बिस्तर पर 
करवटें बदलती हैं.

बड़ी देर में होती हैं 
आजकल सुबहें,
सूरज थका-सा लगता है.

दोपहर उदास है,
शाम चिड़चिड़ी-सी,
वक़्त जैसे ठहरा पानी.

चाँद निकल आया है 
आसमान में, लेकिन 
उसमें धब्बे बहुत हैं.

मुझे आश्चर्य होता है 
कि कैसे बदल देता है दुनिया 
एक बिनबुलाया डर.

रविवार, 15 मार्च 2020

४१०.शोला

Bbq, Barbecue, Coal, Flame, Grill


मैं शोला हूँ,
मुझमें घी मत डालो,
भड़क उठूंगा,
छोड़ दो मुझे चुपचाप,
मैं ठंडा हो जाऊंगा,
राख बन जाऊंगा,
तुम्हें पता भी नहीं चलेगा.

**

मैं शोला था,
राख का बोझ सहता रहा,
तुम आए,
फूँक भी नहीं मारी 
और वापस लौट गए.

गुरुवार, 12 मार्च 2020

४०९.परिवर्तन

Train, Wagon, Windows, Railway

रेलगाड़ी,अब वे दिन कहाँ?

लोग इंतज़ार करते थे, 
ख़ुश होते थे,
जब तुम सीटियाँ बजाती आती थी,
बाँध लेते थे बोरिया-बिस्तर
तुमसे मिलने को बेक़रार रहते थे.

अब तो मजबूरी में मिलते हैं,
उड़ने को आतुर,
कार में चलने के शौकीन,
तुम साफ़-सुथरी राजधानी 
या शताब्दी भी हो,तो क्या?

मायूस मत होओ, रेलगाड़ी,
बस चलती रहो,जब तक हो,
लोगों को पुकारती,
सबका स्वागत करती,
परिवर्तन ही दुनिया का नियम है.

रविवार, 8 मार्च 2020

४०८. कोरोना और होली

Hand, Rang Barse, Holi, Color, Pink
इस बार की होली 
बहुत अजीब होली है.

जब होलिका दहन होगा,
हम किसी कोने में रहेंगे,
बालकनी में खड़े होंगे 
या टी.वी. पर देखेंगे.

न हाथों में अबीर लेकर 
गाल रंगने का सुख होगा,
न बाँहों में भरकर 
गले लगाने की ख़ुशी.

'होली मुबारक' दूर से
डर-डर के कहेंगे,
मुँह पर मास्क लगाएँगे, 
तब घर से निकलेंगे.

कोरोना,
क्या बिगड़ जाता तुम्हारा,
जो थोड़ा सब्र दिखा देते ?
हम होली खेल चुके होते,
फिर तुम आ जाते.

कभी-कभी सोचता हूँ,
तुम्हारी चुनौती स्वीकार लूं,
हमेशा की तरह इस बार भी 
जी भर के होली खेलूँ.

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

४०७. कड़ाही

Fry, Potatoes, Pan, Cook, Oil, Boil

सिंक में पड़ी कड़ाही को
साफ़ करते हुए वह सोचती है 
कि वह भी कड़ाही जैसी ही है,
आग पर चढ़ाई जाती है,
फिर उतारी जाती है,
रगड़ी जाती है,
खुरची जाती है,
पटकी जाती है,
धोई जाती है.

उसमें और कड़ाही में
बस इतना-सा फ़र्क है
कि कड़ाही को कभी-कभार 
आराम मिल जाता है.