लोग जब बांधते हैं
मनौती का धागा,
बूढ़ा पेड़ दुआ करता है
कि मुराद पूरी हो.
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जब ज़ोर से चलती है हवा,
तो सहम जाता है बूढ़ा पेड़,
जबकि झेल चुका है वह
न जाने कितने तूफ़ान.
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एक अरसे बाद
बूढ़े पेड़ पर उगी हैं
थोड़ी-सी पत्तियां,
उसे लगता है,
वह अभी जवान है.
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खेल-खेल में बच्चे
तोड़ना चाहते हैं पत्तियां,
बूढ़े पेड़ ने झुका दी है
अपनी डाली ज़रा-सी.
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बूढ़े पेड़ पर अब
न फल हैं, न पत्ते,
पर देने के लिए उसके पास
बहुत कुछ है अभी भी.
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बूढ़े पेड़ की डाली पर
अब नहीं रहे
झूलों के निशान,
पर भूला नहीं है वह
सावन की मस्ती.
