सोमवार, 6 अप्रैल 2020

४१९. दिया और हवाएँ

Lamp, Earthen, Oil Lamp, Flame, Light
अपनी बालकनी में मैंने 
उम्मीद का एक दिया जलाया,
क्रूर हवाएँ रातभर चलती रहीं,
दिए की लौ लड़खड़ाती रही,
लगा अब बुझी,अब बुझी.

सुबह उठकर मैंने देखा,
दिया जल रहा था बिना तेल के,
बाती का आख़िरी छोर थामे था लौ को,
हवाएँ ख़ामोश थीं,
दूर आकाश में सूरज निकल रहा था.

6 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (7-4-2020 ) को " मन का दीया "( चर्चा अंक-3664) पर भी होगी,
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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  2. सकारात्मकता का संदेश समाहित किये सुन्दर सृजन ।

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  3. यू ही जले उम्मीद की लौ ,बहुत बढ़िया

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  4. यूँ ही आशा की लौ, नवजीवन का सूर्योदय ला के रहेगी।

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  5. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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