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गुरुवार, 8 जनवरी 2026

829. किसे ले गई ट्रेन ?



कई लोग थे प्लेटफॉर्म पर,

एक को चढ़ना था,

बाक़ी सब चढ़ाने आए थे।


ट्रेन आई, तो वह चढ़ गया,

जो चढ़ाने आया था,

जिसका कोई इरादा नहीं था

यात्रा पर निकलने का, 

जिसका सामान घर पर रखा था।

 

जिसे चढ़ना था,

उसका सामान बंधा ही रह गया,

वह प्लेटफॉर्म पर बैठा

इंतज़ार कर रहा है अगली ट्रेन का

जो न जाने कब आएगी,

न जाने किसे ले जाएगी।

 

4 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िंदगी एक ट्रेन का सफ़र... दार्शनिक भाव।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ९ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. देर-सबेर सही ट्रेन आ ही जाएगी ।
    जहाँ जाना है वहाँ ले ही जाएगी ।

    नमस्ते ..२०२६ की ट्रेन फ़िलहाल छूट चुकी है..समय पर है !

    जवाब देंहटाएं