तुम्हारे हाव-भाव,
तौर-तरीक़े, चाल-ढाल
मुझे बिल्कुल पसंद नहीं,
मैं आँखें बंद करके सोचूँ,
तो भी कुछ ऐसा नहीं दिखता,
जो मैं पसंद करूँ तुममें,
पर न जाने क्यों,
तुम्हारा दुःख मुझसे
सहा नहीं जाता,
तुम्हारी ज़रा-सी तकलीफ़
मुझे बेचैन कर देती है,
न जाने क्यों मुझे हर वक़्त
तुम्हारा ही ख़्याल रहता है.
कभी-कभी मैं सोचता हूँ
कि काश मैं तुम्हें प्यार नहीं करता,
जैसे कि मैं तुम्हें पसंद नहीं करता.

