उस घर में
एक टेबल थी,
एक कुर्सी,
जब से मिले,
साथ-साथ थे
एक ही कमरे में.
दोनों धीरे-धीरे
पुराने हो गए हैं,
कुर्सी का एक हाथ,
टेबल का एक पाँव
अब टूट गया है.
इन दिनों कुर्सी बरामदे में,
टेबल आँगन में है,
उनकी जगह अब
नई कुर्सी,नया टेबल है.
दोनों अलग-अलग हैं,
दोनों बेचैन हैं,
दोनों चाहते हैं
कि साथ-साथ रहें,
जब तक कि वे पूरी तरह
टूट न जायँ.

