बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

४९४. रावण की नाभि का अमृत



जब सोख लिया था 

रावण की नाभि का अमृत 

राम के अग्नि-वाण ने,

तभी मरा था रावण.


सदियाँ बीत गईं,

पर लगता है,

पूरा नहीं किया था काम

राम के अग्नि-वाण ने,

बच गया था 

रावण की नाभि में 

थोड़ा-सा अमृत.


तभी तो जीवित है 

अब तक रावण,

लौट आता है बार-बार 

किसी-न-किसी रूप में,

जलता है हर दशहरे में,

पर अट्टहास करता 

फिर आ धमकता है 

अगले दशहरे में.


क्या कोई राम आएगा,

जो मार दे रावण को

हमेशा के लिए,

क्या कोई ऐसा तीर होगा,

जो सोख सके 

रावण की नाभि का 

बचा-खुचा अमृत? 


5 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 23-10-2020) को "मैं जब दूर चला जाऊँगा" (चर्चा अंक- 3863 ) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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  2. https://ki-jaana-main-kaun.blogspot.com/2020/10/blog-post.html - Mera jawaab.

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  3. जब रावण की नाभि का अमृत

    जला दिया था राम ने

    अपने अग्नि-वाण से,

    तभी मरा था रावण.,,,,।बहुत शानदार एवं सत्य,

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  4. तब तो एक रावण था अब असंख्य रावण हैं और वे भी बहुत खतरनाक। बचे हुए अमृत से पैदा हो जाते हैं हर साल
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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