समुद्र, तुम रात-रात भर
जो शोर करते हो,
किसे बुलाते हो?
माना कि तुम जानते हो,
यह सोने का समय नहीं है,
माना कि बहुत सी बाते हैं,
जो चीख-चीख के कहना ज़रूरी है,
पर कोई सुननेवाला भी तो हो.
समुद्र, यहाँ सब सो रहे हैं,
कोई नहीं सुन रहा तुम्हें,
किसी को फ़र्क नहीं पड़ता
तुम्हारे गरजने से.
समुद्र, बंद करो चिल्लाना,
मेरी मानो,
थोड़ी देर तुम भी सो जाओ.




