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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

863. पाटखोड़ी

 


क्या आपने जूट की लकड़ी देखी है?

मेरे यहाँ पाटखोड़ी कहते हैं इसे, 

पतली-सी होती है,कमज़ोर सी,

पाँव पड़ते ही टूट जाती है,

पर जब यह जलती है,

तो देखने लायक होता है इसका जलना,

एकदम से धधक उठती है सिर से पाँव तक. 


एक बार जल उठे,

तो रोकना मुश्किल होता है इसे,

फिर राख होने तक जलती है, 

फिर जलाकर ही मानती है यह। 



9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर जी हाँ हमारे यहाँ यह पूजा में काम आती है ।

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  2. बहुत सुंदर रचना,जी हाँ हमारे यहाँ यह पूजा में काम आती है ।

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  3.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  सोमवार 03अगस्, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  4. जो कमजोर है वही बलवान है

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  5. उफ़्फ़ , दिल भी तो कभी कभी पाठखोड़ी सा हो जाता है , , बस जल कर या जला कर ही मानता है , इस पर अंकुश लगाना भी तो सबके लिए सहज नहीं है ।

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