मैं गीता हूँ,
बाइबल हूँ,
क़ुरान हूँ।
मुझे पढ़ो,
पर वैसे नहीं,
जैसे पढ़ा गया है अब तक।
मुझे थोड़ा पढ़ो,
ज़्यादा समझो,
मुझे अनपढ़ों की तरह पढ़ो,
पढ़े-लिखों की तरह समझो।
वाह!! बहुत सुंदर!! अनपढ़ों की तरह पढ़ने से ही शायद उनका असली अर्थ समझ में आयेगा, व्याख्याएँ तो हज़ारों हो गयीं, पर अर्थ समझ में आया ही नहीं
वाह!! बहुत सुंदर!! अनपढ़ों की तरह पढ़ने से ही शायद उनका असली अर्थ समझ में आयेगा, व्याख्याएँ तो हज़ारों हो गयीं, पर अर्थ समझ में आया ही नहीं
जवाब देंहटाएं