क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी
अनंत से अपनी बारी के इंतज़ार में है,
वह क़तार के आख़िर में इसलिए है
कि नए-नए लोग आते गए
और यह कहकर आगे खड़े होते गए
कि हम जहां खड़े हो जाते हैं,
लाइन वहीं से शुरू होती है।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 24 मई, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
वाह गूढ़ बात
वाह
इस तरह तो उसे सदा इंतज़ार ही करना पड़ेगा
ओह !सरलता से गूढ़ बात
गहन भावाभिव्यक्ति ।
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जवाब देंहटाएंवाह गूढ़ बात
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंइस तरह तो उसे सदा इंतज़ार ही करना पड़ेगा
जवाब देंहटाएंओह !
जवाब देंहटाएंसरलता से गूढ़ बात
गहन भावाभिव्यक्ति ।
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