कल मदर्स डे के अवसर पर सभी माँओं के सम्मान में मेरी यह कविता।
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उसने नहीं सीखा हथियार चलाना,
नहीं लड़ी कोई लड़ाई,
पर वह डटी रहती है
मोर्चे पर हर वक़्त,
डरती नहीं किसी वर्दी से,
ख़ौफ़ नहीं उसे किसी दुश्मन का।
उसका घर उसका देश है,
देहरी देश की सीमा,
बच्चे देश के नागरिक,
उसके होने भर से
महफ़ूज़ रहता है उसका देश,
चैन से सोते हैं उसके बच्चे।
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