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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

852. उसके हिस्से में

 


वह खाना अच्छा बनाती थी,
उसके हाथों में जादू था,
चटखारे लेकर खाते थे घरवाले,
तारीफ़ करते थे उसके खाने की।
वह खाना इतना अच्छा बनाती थी
कि उसके हिस्से में तारीफ़ आती थी,
पूरा खाना कभी नहीं आता था।


1 टिप्पणी:

  1. और वह कड़ाही में लगी खुरचन से ही पेट भर लेती थी अपना, हाँ, होता था ऐसा पहले, अब भी शायद कहीं होता होगा, मार्मिक रचना!

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