और वह कड़ाही में लगी खुरचन से ही पेट भर लेती थी अपना, हाँ, होता था ऐसा पहले, अब भी शायद कहीं होता होगा, मार्मिक रचना!
और वह कड़ाही में लगी खुरचन से ही पेट भर लेती थी अपना, हाँ, होता था ऐसा पहले, अब भी शायद कहीं होता होगा, मार्मिक रचना!
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