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रविवार, 5 अप्रैल 2026

851. आज का युद्ध

 

सुनो सीता,

अच्छा होता,

अगर रावण से युद्ध आज होता,

न उतना समय लगता,

न उतना कष्ट होता। 


न कहीं जाने की ज़रूरत होती,

न बंदर-भालू इकट्ठा करने की, 

न समुद्र पर पुल बनाना पड़ता, 

बस कुछ मिसाइलें काफ़ी होतीं। 


जला देते लंका बिना हनुमान के, 

गुप्तचरों से पूछ लेते ज़रूरी ठिकाने,

चुपके से गिरा देते वहाँ बम,

मार देते रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद को। 


सुनो, सीता,

मैं राम हूँ, मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ, 

तुम्हारा अपहरण नहीं होता, 

तो मैं युद्ध नहीं करता,

पर मेरी जगह कोई और होता,

तो चढ़ाई कर देता बिना कारण,

उठवा लेता लंका का सारा सोना।







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