पंछी,
ठंड बहुत है,
पर दूर मत जाना,
यहीं रहना।
यहाँ की मिट्टी,
यहाँ के पेड़,
यहाँ की हवा-
मरने नहीं देंगे तुम्हें।
पंछी,
तुम्हारे परों में ताक़त है,
आसानी से भाग सकते हो तुम
मगर पंख उड़ने के लिए होते हैं,
भागने के लिए नहीं।
पंछी,
तुम्हें जाना है, तो जाओ,
पर इतना कहा मानना,
कभी लौटकर मत आना,
बड़ी मुश्किल से पड़ती है
किसी के बिना रहने की आदत।

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ।
जवाब देंहटाएंभावपूर्ण अभिव्यक्ति।
जवाब देंहटाएंसादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार १३ मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
पंछी के बहाने किसी को रोकने की कोशिश है, पर पंछी को तो उड़ना है, उसका वादा उस दूसरे प्रदेश से भी तो है
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत ही खूबसूरत प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति। आज के पंछियों के माँ-बाप को बस इतने उद्बोधन का ही अधिकार रह गया।सादर।
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति ओंकार जी
जवाब देंहटाएंमगर पंख उड़ने के लिए होते हैं,
जवाब देंहटाएंभागने के लिए नहीं। - वाह!!!!!!!!!!