पंछी,
ठंड बहुत है,
पर भागकर मत जाना,
यहीं रहना।
यहाँ की मिट्टी,
यहाँ के पेड़,
यहाँ की हवा-
मरने नहीं देंगे तुम्हें।
पंछी,
तुम्हारे परों में ताक़त है,
आसानी से जा सकते हो तुम
हज़ारों किलोमीटर दूर,
मगर पंख उड़ने के लिए होते हैं,
भागने के लिए नहीं।
पंछी,
मुझे तो यहीं रहना है,
तुम्हें जाना है, तो जाओ,
पर इतना कहा मानना,
लौटकर मत आना,
बड़ी मुश्किल से पड़ती है
किसी के बिना रहने की आदत।

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