शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2019

३८३. बोलो

बोलो 
कि चुप रहना ज़रूरी नहीं है,
न ही यह तुम्हारे हित में है.

हो सकता है, 
तुम्हारे चुप रहने से 
यह मान लिया जाय 
कि तुम्हें बोलने की ज़रूरत ही नहीं 
और तुम्हारी जीभ काट ली जाय.

यह भी हो सकता है 
कि आज तुम्हारे चुप रहने से 
दूसरे लोग तब चुप रहें,
जब उनका बोलना 
तुम्हारे लिए बेहद ज़रूरी हो.

डरो मत, बोलो,
गूंगे भी चुप नहीं रहते,
तुम्हारे मुंह में तो फिर भी ज़ुबान है.

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 05 अक्टूबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (0६ -१०-२०१९ ) को "बेटी जैसा प्यार" (चर्चा अंक- ३४८०) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  3. बहुत सटीक जागरूकता का आह्वान करती रचना।

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  4. बोल कि लब आजाद है तेरे....
    सुंदर रचना।

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  5. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ,कभी कभी बोलना बहुत जरूरी होता हैं,सादर नमस्कार

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  6. अपना एहसास कराना जरूरी है ... बोलना जरूरी है ...
    अच्छी रचना ...

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  7. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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