शुक्रवार, 31 मई 2019

३६१. ख़लल

Alarm Clock, Classic, Clock, Dial, Gold

मेरे कमरे की दीवार पर एक घड़ी है,
जो हमेशा चलती ही रहती है,
कोई उसकी ओर देखे या न देखे.

कभी-कभार मुझे ज़रूरत पड़ती है,
तो मैं उसकी ओर देख लेता हूँ,
वह सही समय बता देती है,
फिर मैं उसे भूल जाता हूँ.
रात को उसकी टिक-टिक गूंजती है,
तो अलमारी में रख देता हूँ उसे.

चलते रहनेवालों को क्या मालूम 
कि उनके चलने से कभी-कभी 
सोनेवालों की नींद में ख़लल पड़ता है.

13 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02 -06-2019) को "वाकयात कुछ ऐसे " (चर्चा अंक- 3354) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ....
    अनीता सैनी

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  2. सही कहा आपने चले वाले को क्या पता रुकना किसी कहते हैं और उनके चलने से किसी और को क्या परशानी होती हैं ,कुछ अलग सा लेकिन अच्छा ,सादर

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  3. चलने वाले भी कभी तो सोते होंगे और सोने वाले भी कभी तो चलते होंगे...हिसाब बराबर

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार जून 01, 2019 को साझा की गई है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  5. बहुत सुंदर कविता..वाह👌

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  6. फिर भी घडी है की चलना नहीं छोडती ... जीवन भी ऐसा है कभी आवाज़ तो कभी बे आवाज़ ...

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  7. वाह क्या सुंदर लिखावट है सुंदर मैं अभी इस ब्लॉग को Bookmark कर रहा हूँ ,ताकि आगे भी आपकी कविता पढता रहूँ ,धन्यवाद आपका !!
    Appsguruji (आप सभी के लिए बेहतरीन आर्टिकल संग्रह) Navin Bhardwaj

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  8. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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