आजकल मेरे सिर का बोझ
मेरी गर्दन से सहन नहीं होता,
सिर से अलग तो हो नहीं सकती,
बस दर्द से कराहती रहती है.
मेरे घुटनों से सहन नहीं होता
आजकल मेरे बदन का बोझ,
साथ रहना तो मजबूरी है,
बस दर्द से परेशान रहते हैं.
मेरी ज़रूरतों का बोझ नहीं उठता
आजकल मेरी मेहनत से,
मेरी ख्वाहिशों का बोझ
मेरे ईमान से सहन नहीं होता.
इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
लड़ रहा हूँ अपने आप से,
आजकल मेरे ही दो हिस्से
एक दूसरे के विरोध में हैं.
मेरी गर्दन से सहन नहीं होता,
सिर से अलग तो हो नहीं सकती,
बस दर्द से कराहती रहती है.
मेरे घुटनों से सहन नहीं होता
आजकल मेरे बदन का बोझ,
साथ रहना तो मजबूरी है,
बस दर्द से परेशान रहते हैं.
मेरी ज़रूरतों का बोझ नहीं उठता
आजकल मेरी मेहनत से,
मेरी ख्वाहिशों का बोझ
मेरे ईमान से सहन नहीं होता.
इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
लड़ रहा हूँ अपने आप से,
आजकल मेरे ही दो हिस्से
एक दूसरे के विरोध में हैं.
